रायगढ़। जिले के चपले ग्राम पंचायत में मनरेगा (जी-रामजी योजना) के तहत चल रहे तालाब गहरीकरण कार्य में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर लगे बोर्ड के अनुसार, ₹8,75,500 की लागत वाला यह काम 31 मार्च 2026 को ही पूर्ण घोषित कर दिया गया है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। अप्रैल का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यहाँ न केवल काम जारी है, बल्कि रात के अंधेरे में JCB मशीनों से अवैध खुदाई भी की जा रही है।
मजदूरों का हक मारकर मशीनों से काम
नियमों के मुताबिक, मनरेगा के काम केवल मजदूरों (Job Card Holders) द्वारा किए जाने चाहिए। लेकिन चपले के इस तालाब में मजदूरों की जगह JCB और ट्रैक्टरों का बोलबाला है। स्थानीय ग्रामीणों और रिपोर्टिंग के दौरान यह पाया गया कि रात के समय चोरी-छिपे मशीनों से मिट्टी निकाली जा रही है और उसे अवैध रूप से बेचा जा रहा है। भारी वाहनों के चलने के कारण गाँव की मुख्य सड़क भी पूरी तरह से जर्जर और धूल भरी हो चुकी है, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया है।
प्रशासन को धोखे में रखने का खेल
हैरानी की बात यह है कि जिस काम को बोर्ड पर 'पूर्ण' (Complete) दिखाया गया है, वहां ताजी खुदाई के निशान साफ देखे जा सकते हैं। यह सीधे तौर पर शासन की आंखों में धूल झोंककर सरकारी राशि के गबन की कोशिश नजर आती है
रोजगार सहायक के बयान
जब इस संबंध में रोजगार सहायक से सवाल किए गए, तो उन्होंने कई चौंकाने वाली बातें स्वीकार कीं उन्होंने माना कि काम पूरा नहीं हुआ था, लेकिन विभाग से मिले 31 मार्च के 'डेडलाइन' के दबाव में काम को कागजों में पूर्ण दिखा दिया गया। मशीनों से खुदाई की बात पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई और कहा कि शायद कोई चोरी से मिट्टी ले जा रहा है, जिसकी वे FIR दर्ज कराएंगे। फर्जी हाजिरी का संदेह, जहाँ काम मशीनों से हो रहा है, वहां मस्टर रोल में मजदूरों की हाजिरी (NMMS) भरने पर भी सवाल उठ रहे हैं। 8 लाख से अधिक के इस प्रोजेक्ट में जहाँ दर्जनों मजदूरों को काम मिलना चाहिए था, वहां की हकीकत पर सहायक ने कहा— "पहले 47-48 मजदूर आ रहे थे, लेकिन अब धूप और शादियों के कारण सिर्फ 5-6 लोग ही हाजिरी (NMMS) लगा रहे हैं।"
